रविवार, 12 मई 2013

किसकी किस्मत ज्यादा खराब थी... बकरी की या मंत्री की...

.
.
.



आप ही की तरह अपने को भी खबरें मीडिया से ही मिलती हैं... रेलगेट में भाँजे-भतीजे-बेटे-पत्नी यहाँ तक कि दामादों तक का भी नाम व हाथ सामने आने के बाद यह तो निश्चित था कि रेलमंत्री पवन बंसल अपनी कुर्सी नहीं बचा पायेंगे...

पर फिर भी उन्होंने हर यत्न किया... 


यहाँ तक कि कार्यालय जाने से पहले विशेष रूप से लाई गयी सफेद बकरी पर हाथ फेरा और उसे कुछ खिलाया भी... यह सब इसलिये कि मंत्रीपद बचा रहे...

टाइम्स ऑफ इंडिया एक वीडियो दिखा रहा है  Railway Minister Pawan Kumar Bansal was seen feeding a goat, which was reportedly sacrificed later.10 May 2013, 5:52PM IST (लिंक)

एक आम, लाचार, मजबूर और अपनी नियति से वाकिफ प्रजा होने के कारण मुझे न घूसखोरी से कोई शिकायत है न किसी के मंत्री बने रहने अथवा न रहने से...

मेरा तो सीधा सादा सवाल है कि...



किसकी किस्मत ज्यादा खराब थी... बकरी की या मंत्री की...?
आप कुछ कहना या बताना चाहेंगे ?






...

7 टिप्‍पणियां:

संजय अनेजा ने कहा…

किस्मत हमेशा निरीह की खराब होती है।

डॉ टी एस दराल ने कहा…

एक के कर्म खराब थे , दूसरी की किस्मत।

अली सैयद ने कहा…

काली लाल रेल के लिए सफ़ेद बकरी ? या बकरा ? फिर उसको हरा चारा / कुछ सिक्के और सिर पर आशीष का हाथ, बात कुछ हजम नहीं हुई :)

टीवी पर देखा कोई सिन्हा ? साहब (ज्योतिषाचार्य)कह रहे थे कि राहू के लिए टोटका है ज़ल्दी फल देता है,मंत्री जी (भूतपूर्व )के काउंसलर ने सुझाया होगा :)

हमसे पूछते तो हम कहते, यजमान कमल अर्पित करो सब ठीक हो जायेगा :)

अब मुद्दा आपके सवाल का, तो अपना जबाब ये है कि यदि किस्मत को ही खराब कहना है तो उस काउंसलर की कहिये ! सफ़ेद बकरे और अ-मंत्री से नाहक छेड़छाड़ छोड़िये ! वे दोनों तो इस फील्ड के मासूम प्यादे हुए ना :)

anshumala ने कहा…

हर हाल में बकरी की :(
उसे तो कटना ही था कुर्सी बचती तो ख़ुशी में कटती अब कुर्सी चली गई है तो कुर्सी न बचाने के लिए गुस्से में कटी होगी :(

Vikas Gupta ने कहा…

बकरी तो आम जनता है जिसे हर हाल में कटना ही हैं ।

Er. Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता ने कहा…

.....

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

बकरा-बकरी की किस्मत क्या कहें..वो तो जिबह के लिए ही पाली जाती हैं। मंत्री की क्या कहें..जो बकरी से अपनी किस्मत जोड़े बैठा हो, उसे तो जाना ही था।